मिट्टी

शाम होने वाली थी या शायद अभी वक़्त था , 5:30 हो गया था लेकिन बाहर धूप थी। मैं  सोफे पर निढाल पड़ी थी ,मेरी दोस्तों से ग्रुप चैट चल रही थी ,जिसका रिप्लाई करने के लिए सर उठाती और बड़ी तेज़ी से रिप्लाय करके फिर से पड़ जाती। काफी देर से मुझे कुछ भूख जैसा भी महसूस हो रहा था जैसा की आप समझ ही गए होंगे की मैं बड़े आलसी मिज़ाज़ की हूँ तो मेरे लिए उठ कर किचन की तलाशी लेना बड़ा मुश्किल काम था।
तभी घर में पापा की एंट्री हुई , मुझे यूँ पड़ा देख पापा ने लेक्चर शुरू कर दिया , उनके लेक्चर में जल्दी उठने के फायदे , मोबाइल से होने  नुकसान , हरी सब्ज़ियों की ज़रूरत ,बढ़ती महंगाई ,प्याज के दाम ,ग्लोबल वार्मिंग , पिछली बार अम्मी से हुई लड़ाई। आखिर में उन्होंने सर दर्द दूर करने के लिए छत पर जाने के के लिए बोला और मैंने उनके सामने से गायब होने में हे भलाई समझी। मेरी छत पर बहुत से गमले थे ,फ़ोन नीचे रह जाने की वजह से मैंने उन सबका जायजा लेने की सोची।  सूखे गमलो में पानी डालने के बाद मिट्टी मुलायम पड़  गयी , मैं यह देख ही रही थी की उसने मुझसे और पानी माँगा फिर पेट भर पानी पी कर बोली-" मिल गया तुम्हे वक़्त मेरे पास आने का  दिन मैं प्यास से मरी जा रही थी तुम अब आयी हो मेरे पास। "
मेरे पास तो कोई बहाना नहीं था तो मैं चुप रही।
लेकिन वो कहाँ होने वाली थी "धीरे धीरे हर जगह उस काले डामर की रोड बनाते चले जा रहे तुम लोग और मेरा क्या , मुझे तोह कोई पूछता ही नहीं और मेरे  भाई , वो पेड़  जो मुझे हमेशा संभाले रहते थे उन्हें भी काटते चले रहे।  आये दिन खोद डालते हो कभी यहाँ तो कभी वहां"
लग रहा था आज साडी भड़ास मुझ पर निकलने वाली थी।
"मैंने तुम सब को क्या नहीं  दिया , सब्ज़ियां, फल , अनाज और तुम सब हो की मुझे झाड़ कर आगे निकलते जा रहे हो। "
"और वो तुम्हारे पडोसी शर्मा , मेरे तो हाथ धोकर पीछे पड़े रहते हैं , झाड़ू लेकर आ जाते हैं पर मैं भी कम नहीं हूँ , जब मेरी मौसेरी बहन आंधी आती है ना तो मई उनके घर के कोने  कोने में जाकर भर जाती हूँ।
और वो मैडम rosy उनको तो मुझसे बड़ी नफरत है जब देखो तब कपडे झाड़ा करती हैं , पिछली बार जब धड़ाम से गिरी थी तो ऊपर से नीचे मुझि में लिपटी हुई थी।
और तुम सब जो ये नाटक बनाये हो ना की " मुझे धूल से एलर्जी है ,घूम फिर कर एक दिन हमी में समां जाना है।
अब तो मिट्टी मैडम भौकाल में धमकी दे रही थी। तभी अम्मी नीचे से आवाज़ें लगाने आने लगी तब मैंने मैडम से अलविदा ली और आगे का दुखड़ा सुनने का वादा करके भाग आयी।

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