बदलते गीत

जिस तरह ज़माना तेज़ी से बदल रहा है , हम सब की आदते भी तेज़ी से बदल रही । अब सुबह चाय की चुस्की के साथ
अखबार की सुर्खिया पढ़े या ना पढ़े लेकिन व्हाटसैप स्टेटस चेक करना जरूरी हो गया है। आज ऐसे ही स्टेटस देखते हुए बरलाव के नए आयाम पर नज़र गई कि कैसे पुरानी गज़लों के नए रिमीक्स बनाए जा रहे है। ऐसे एक दो रिमीक्स हिट क्या हो गए , अब हर गज़ल की बैड़ बजा कर यू-ट्यूब पर पहुंचा दिया जाता है और कंमेट सेक्शन देख लो तो खोती संस्कृति का रोने वाले दिख ही जाते है। 
पर बदलाव तो हमेशा से प्रकृति का नियम रहा है , अब वो बुरा भी होता है और अक्सर अच्छा भी । ऐसे पुराने गीतों पर नई धुन लगा लगा कर पेश करना ये तो साबित कर देता है कि क्रिएटिविटी में खासी कमी आ रही है जो बुरा है , पर अच्छा ये है कि पुरानी ग़जलो और कव्वाली को दोबारा नए तरीके से पेश करना वैसा ही है जैसे पुरानी किताबो पर नया कवर चढ़ा देना । अब नए रिमीक्स को सुनकर भले ही सर दर्द हो लेकिन उसे सही करने के लिए वापस पुराना सुनते ही है और वैसे भी रिमीक्स या रैप किसी के साथ ही सही पर नई पीढ़ी तक आवाज़ पंहुचना जरूरी है।

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