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You were my bridge

You know how when you're driving and it's pouring down rain, you drive under a bridge and everything stops. Everything goes silent and it's almost peaceful. Then you finally get out from under the bridge, and everything hits you a little harder than before. You were my bridge.

MEN OF BURDEN

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खींचते रिक्शा लपेटे राह पैरो में  आ पड़ी है हर मनुज की चाह पैरों में  हम भुजाओं में धरा के अश्र भर लेंगे  हम श्रमिक श्रम से धरा को धन्य कर देंगे  इंसान का बोझ ढोने वाले इंसानो के बदन अब कमज़ोर पड़ रहे। भारत में गरीबो के हालात तकलीफ देह हैं , उन्ही में से कुछ रिक्शा चालक भी हैं।  तेज़ी से भागती हुई ज़िन्दगी में रिक्शावालों की रफ़्तार धीमी पड़ती जा रही है। इ - रिक्शा के आने के बाद अब तो इनकी आमदनी ना के बराबर हो गई है।  ना तो ज़रा भी पढ़े लिखे हैं की कोई और काम कर ले और बाकी वाहन इतने इफ़राद हैं की उनको लेकर भी कमाई में कोई ख़ास फर्क नहीं आ पाएगा। धीरे धीरे काम ख़त्म होने का डर भी है पर उम्मीद भी। सालों से रास्ते तय किये है फिर भी मंज़िल नज़र नहीं आ रही है।  https://youtu.be/s4oie-wupWI

बदलते गीत

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जिस तरह ज़माना तेज़ी से बदल रहा है , हम सब की आदते भी तेज़ी से बदल रही । अब सुबह चाय की चुस्की के साथ अखबार की सुर्खिया पढ़े या ना पढ़े लेकिन व्हाटसैप स्टेटस चेक करना जरूरी हो गया है। आज ऐसे ही स्टेटस देखते हुए बरलाव के नए आयाम पर नज़र गई कि कैसे पुरानी गज़लों के नए रिमीक्स बनाए जा रहे है। ऐसे एक दो रिमीक्स हिट क्या हो गए , अब हर गज़ल की बैड़ बजा कर यू-ट्यूब पर पहुंचा दिया जाता है और कंमेट सेक्शन देख लो तो खोती संस्कृति का रोने वाले दिख ही जाते है।  पर बदलाव तो हमेशा से प्रकृति का नियम रहा है , अब वो बुरा भी होता है और अक्सर अच्छा भी । ऐसे पुराने गीतों पर नई धुन लगा लगा कर पेश करना ये तो साबित कर देता है कि क्रिएटिविटी में खासी कमी आ रही है जो बुरा है , पर अच्छा ये है कि पुरानी ग़जलो और कव्वाली को दोबारा नए तरीके से पेश करना वैसा ही है जैसे पुरानी किताबो पर नया कवर चढ़ा देना । अब नए रिमीक्स को सुनकर भले ही सर दर्द हो लेकिन उसे सही करने के लिए वापस पुराना सुनते ही है और वैसे भी रिमीक्स या रैप किसी के साथ ही सही पर नई पीढ़ी तक आवाज़ पंहुचना जरूरी है।

कैद

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गहरा समंदर न जाने कितनी ही अनोखी चीज़े समेटे हुए है। जिसमें से ही एक अनोखा जीव है वीनस फ्लावर बास्केट । जिसका वैज्ञानिक नाम Euplectella aspergillum भी है। यह ज़्यादातर फिलीपींस और जापान के आस पास ,तीन से पांच हज़ार फ़ीट की गहराई में पाया जाता है , यह प्राणी दरअसल एक स्पंज का टुकड़ा है क्यूंकि देखने में यह काँच जैसा दिखता है तो इसे ग्लास स्पंज भी कहते है और जब इसमें , चिरांट का जोड़ा रहने आता है तो वह हमेशा के लिए कैद हो जाता है। इसी स्पंज में ही वह दोनों अपना जीवन बिताते है हालाँकि इनके बच्चे आकार में छोटे होने के कारण एक समय पर बाहर निकाल जाते है , समंदर के अंधेरे में साथ रहने और साथ मरने के कारण ये प्यार के प्रतीक बन जाते है इसीलिए साउथ एशिया में यह शादियों में दिए जाने वाला पसंदीदा तोहफा है। जो साथ जीने और मरने की हिदायत करता है और तो और  आप चाहें तो अलीबाबा काम से इसे खरीद भी सकते है और किसी को देकर अपने साथ का वादा भी कर सकते है। 

मिट्टी

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शाम होने वाली थी या शायद अभी वक़्त था , 5:30 हो गया था लेकिन बाहर धूप थी। मैं  सोफे पर निढाल पड़ी थी ,मेरी दोस्तों से ग्रुप चैट चल रही थी ,जिसका रिप्लाई करने के लिए सर उठाती और बड़ी तेज़ी से रिप्लाय करके फिर से पड़ जाती। काफी देर से मुझे कुछ भूख जैसा भी महसूस हो रहा था जैसा की आप समझ ही गए होंगे की मैं बड़े आलसी मिज़ाज़ की हूँ तो मेरे लिए उठ कर किचन की तलाशी लेना बड़ा मुश्किल काम था। तभी घर में पापा की एंट्री हुई , मुझे यूँ पड़ा देख पापा ने लेक्चर शुरू कर दिया , उनके लेक्चर में जल्दी उठने के फायदे , मोबाइल से होने  नुकसान , हरी सब्ज़ियों की ज़रूरत ,बढ़ती महंगाई ,प्याज के दाम ,ग्लोबल वार्मिंग , पिछली बार अम्मी से हुई लड़ाई। आखिर में उन्होंने सर दर्द दूर करने के लिए छत पर जाने के के लिए बोला और मैंने उनके सामने से गायब होने में हे भलाई समझी। मेरी छत पर बहुत से गमले थे ,फ़ोन नीचे रह जाने की वजह से मैंने उन सबका जायजा लेने की सोची।  सूखे गमलो में पानी डालने के बाद मिट्टी मुलायम पड़  गयी , मैं यह देख ही रही थी की उसने मुझसे और पानी माँगा फिर पेट भर पानी पी कर बोली-" मिल गया तुम्हे वक़्त...

ढहती दीवार

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आज फिर , देर रात बीत गयी है थी दिमाग भी सोने की हिदायत दे रहा था और उँगलियाँ भी स्क्रॉल करके थक गयीं है। करवट बदल कर देखा तो नानी सोई हुई थी गहरी नींद में , आज कल   बड़ी मुश्किल से नींद आती है उन्हें। मैं एक टक उनकी आँखों को देखती रही , ज़िन्दगी के लम्बे सफर की थकन आँखों में उतर आयी थी। उम्र के इस पड़ाव पर जो खोया उसकी फेहरिस्त लम्बी है और जो पाया उसका हिसाब नहीं मिलता , अब काँपतें हाथ बस   सहारे की उम्मीद करते हैं फिर चाहे वो कोई भी हो। जिस्म मज़बूर कर देता है इंसान को , पर सोचने वाली बात है जो हाथ नन्ही उँगलियाँ थाम कर चलना सिखाते हैं , लड़खड़ाने पर सँभालते हैं , वो क्यों इस कदर बेबस हो जाते हैं। भारत में बुज़ुर्ग यानी 60 साल से ज़्यादा उम्र की लगभग आधी आबादी रिश्तेदारों के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की शिकार है।   सामाजिक संस्था हेल्पएज इंडिया के सर्वे के मुताबिक देश के 12 महानगरों में 1200 से ज़्यादा बुज़ुर्गो से ब...

रात ने फ़िर...

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रात ने फिर याद की खिड़की खोल दी  बंध गए थे जो ख्वाब उनकी गिरह खोल दी। चल पड़े फिर बेख्याली में रास्तों ने फिर मंजिल छोड़ दी। घुल रही है यादों की खुश्बु इस कदर जैसे इत्र की शीशी तोड़ दी। देखा जो फिर हथेली की ओर  लकीरों ने उम्मीद तोड़ दी। नीदें भी अब ख्वाबों की जिंद नही करती आंखो ने ये बुरी आदत छोड़ दी रात ने फिर याद की खिड़की खोल दी।