शाम होने वाली थी या शायद अभी वक़्त था , 5:30 हो गया था लेकिन बाहर धूप थी। मैं सोफे पर निढाल पड़ी थी ,मेरी दोस्तों से ग्रुप चैट चल रही थी ,जिसका रिप्लाई करने के लिए सर उठाती और बड़ी तेज़ी से रिप्लाय करके फिर से पड़ जाती। काफी देर से मुझे कुछ भूख जैसा भी महसूस हो रहा था जैसा की आप समझ ही गए होंगे की मैं बड़े आलसी मिज़ाज़ की हूँ तो मेरे लिए उठ कर किचन की तलाशी लेना बड़ा मुश्किल काम था। तभी घर में पापा की एंट्री हुई , मुझे यूँ पड़ा देख पापा ने लेक्चर शुरू कर दिया , उनके लेक्चर में जल्दी उठने के फायदे , मोबाइल से होने नुकसान , हरी सब्ज़ियों की ज़रूरत ,बढ़ती महंगाई ,प्याज के दाम ,ग्लोबल वार्मिंग , पिछली बार अम्मी से हुई लड़ाई। आखिर में उन्होंने सर दर्द दूर करने के लिए छत पर जाने के के लिए बोला और मैंने उनके सामने से गायब होने में हे भलाई समझी। मेरी छत पर बहुत से गमले थे ,फ़ोन नीचे रह जाने की वजह से मैंने उन सबका जायजा लेने की सोची। सूखे गमलो में पानी डालने के बाद मिट्टी मुलायम पड़ गयी , मैं यह देख ही रही थी की उसने मुझसे और पानी माँगा फिर पेट भर पानी पी कर बोली-" मिल गया तुम्हे वक़्त...