ज़िद (زد )
मोबाइल का अलॉर्म बंद कर , राजेश ने बिस्तर से अलविदा ली और बाथरूम में जाकर शरण ली। थोड़ी देर में वापस आ कर अलमारी से , बिना ध्यान दिए कोई सूट निकाल कर बदन पर डाल लिया। ऑफिस की ज़रूरी फाइल ली और नाश्ते पर आ गए।
माँ हमेशा ली तरह नाश्ता तैयार कर राजेश के इंतज़ार में थी। राजेश ने आराम से नाश्ता शुरू किया और माँ ने फिर से उन लड़कियों के नाम गिनाने ,जो पिछली बार रिश्ते के लिए बताये थे। जिनके जवाब में राजेश हमेशा की तरह चुप्प था या शायद उसने सुना ही नहीं , राजेश की उम्र कुछ 32 -34 के करीब होगी , लंबा -चौड़ा शरीर ,तराशे हुए नैन -नक्श पर आँखों में ख़ामोशी और चेहरे पर उदासी।
नाश्ता ख़तम करने और माँ की हर बात में हाँ में हाँ मिलाने के बाद , राजेश ने घर से अलविदा ली।
.... तो कुछ ऐसी ही रहती है राजेश की सुबह ,काफी बोरिंग थी ना। ...
तो छोड़िये राजेश को और आ जाइये। राज़ पर। ...
गली के नुक्कड़ पर वो चाय की दुकान जिसपे रोज ये अपनी टोली के साथ नज़र आ जाते क्यूंकि मोहल्ले का हर लड़का इनका यार था और हाँ इन जनाब को किसी से प्यार था। चाय की चुस्की के साथ जनाब फ़रमाते कि - "इश्क़ गरम चाय और दिल पारले -जी बिस्कुट है अगर ज्यादा डुबाओगे तो टूट जाएगा। "
हालाँकि जब वो नुक्कड़ के पास से गुज़रती तो ये बालों को सेट कर पोजीशन में आ जाते और अगर नज़रे मिलती तो दोनों मुस्कुराते और अक्सर इन मुस्कराहट के बीच इनके कई बिस्कुट टूट जाते।
ये जनाब जाने जाते थे , अपनी किलर स्माइल और तेरे नाम वाले बालों के लिए।
मिज़ाज़ के थोड़े अल्हड़ थोड़े आवरा और बला के ज़िद्दी। हमेशा गली से गाना गाते और ज़ुल्फ़ें झटकते हुए निकलते।
... और इनकी हर सुबह कुछ ऐसी होती थी। लेकिन दोनों में कोई फ़र्क़ नहीं था क्यूंकि
राजेश ,अब से 10 साल पहले राज हुआ करते थे , और गलती से भी कोई इन्हें राजेश बुला दे तो उसकी खैर नहीं।
माँ-बाप के दुलारे और दादी के प्यारे। पिता जी इनकी हर ज़िद पूरी करते पर वक़्त की ज़िद के आगे सब हार जाते हैं। वक़्त ने करवट बदलने की ठान ली थी। पिता जी वक़्त के आगे ज़िन्दगी हार गए।
राजेश पर ज़िम्मेदारी पड़ी तो राज कहीं खो गया बचा तो बस राजेश।
वो वक़्त के साथ आगे बढ़ता गया और पीछे बहुत कुछ छोड़ दिया। ... वो नुक्कड़ की चाय और वो गलियां छोड़ दी। गलियों में गाना छोड़ दिया। बेवजह हँसना -मुस्कुराना छोड़ दिया शायद उसने अब ज़िद करना छोड़ दिया।

masha allah bahut hi accha likhti h aap
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